जुनून की हद है इजरायल

इजरायल एक देश नहीं जुनून का नाम है और इसे आप वहां के बाजारों से लेकर यूनिवर्सिटीज और स्टार्टअप तक में महसूस कर सकते हैं। कान लगाएं तो हर जगह से एक ही बात सुनाई देती है इजरायल, इजरायल। जबकि वहां सीमा पर घात लगाए बैठे शत्रुओं के अलावा भीतरघाती भी कम नहीं हैं। कुछ खास बस्तियां इजरायल के लिए आस्तीन और वहां के रहवासी उसमें बसे सांपों की तरह हैं, लेकिन फिर भी देश के प्रति महोब्बत जुनून की हद तक है, जो तमाम खतरों को घुटने टेकने पर मजबूर कर देती है।
मुझे कुछ दिन इजरायल रहने का मौका मिला। यात्रा के दौरान मैंने इजरायल के स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, स्टार्टअप, फिल्टरेशन प्लांट, वॉटर सप्लाय सिस्टम, खेत-खलिहान, शहर-गांव, बाजार देखे। इन तमाम जगहों पर कई तरह के लोगों से मुलाकात हुई। इनमें राह चलते लोगों से लेकर विभिन्न मंत्रालयों के उच्चाधिकारी, कंपनियों के कर्ता-धर्ता, प्रोफेसर, युवा उद्यमी शामिल थे। उनसे इजरायल से जुड़े ढेर सारे विषयों पर बात हुई। यहूदी और क्रिश्चियन के मतांतर, मुस्लिम व अन्य आर्थोडॉक्स जातियों के अंतरविरोध से लेकर सीमा पार के शत्रुओं पर भी चर्चा हुई। एक बात जो इन तमाम चर्चाओं में कॉमन थी वह था लोगों में इजरायल के प्रति अगाध प्रेम, समर्पण और देश के लिए कुछ कर दिखाने का जज्बा।
हर आदमी में भरे इस देशप्रेम के पीछे की वजह निश्चित तौर पर अपनी जमीन, अपनी मिट्टी को पाने के लिए पीढिय़ों द्वारा किया गया लंबा इंतजार व संघर्ष ही होगा। हालांकि प्रकारांतर से हमने में भी आजादी के लिए कम संघर्ष नहीं किया है, लेकिन आजादी के बाद देशप्रेम को उसी परिमाण में बरकरार रख पाने में हम नाकामयाब रहे, जबकि इजरायली अपनी जमीन हासिल करने के बाद उसे सपनों का देश बनाने में जुट गए। अब तक उसी जुनून के साथ जुटे हुए हैं।
उन्होंने वक्त पर अपनी ताकत पहचानी और पूरे देश को ही जैसे रिसर्च और डेवलपमेंट लैबोरेटरी में बदल दिया। स्थिति यह है कि मैं जिस फ्लाइट से इजरायल पहुंचा, उसमें दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अफसर भी सवार थे, जो इजरायल में सुरक्षा संबंधी प्रशिक्षण लेने के लिए आए थे और जिस फ्लाइट से लौटा उसमें देश के विभिन्न स्कूलों के कोई एक दर्जन बच्चे थे, जो वहां सायबर सिक्योरिटी पर कोई कोर्स करके लौट रहे थे। आप छोटे से देश के जिस हिस्से में भी जाएंगे इजरायली कोई बड़ा करिश्मा करते नजर आएंगे। येरुसलेम में जलप्रदाय का सिस्टम देखकर आंखें फैल जाती हैं। जमीन के अंदर इतना बड़ा टैंक बना रखा है कि कई दिनों की प्यास बुझाई जा सकती है। घर-घर तक फैली पाइप लाइन और मीटर पानी की बूंद-बूंद का हिसाब रखते हैं।
समुद्र के पानी को पीने लायक बनाने के लिए दुनिया का सबसे बड़ा प्लांट लगा हुआ है। जहां बमुश्किल 20 मिनट में समुद्र के पानी से सारा लवण खींचकर उसे पीने लायक बना दिया जाता है। वेस्ट वाटर के इतने उपयोग हैं कि समझना मुश्किल है। सीवरेज का ट्रीटमेंट कर उससे खाद बनाई जाती है, गैस से प्लांट में रोशनी की जाती है और बचा पानी किसानों को ट्रांसपोर्टेशन की कास्ट पर खेती के लिए उपलब्ध करा दिया जाता है।
टेक्नियान यूनिवर्सिटी के नोटिस बोर्ड पर नोबल पुरस्कार प्राप्त प्रोफेसर्स का जिक्र बड़े फक्र के साथ होता है। तेल अवीव के पास इंडस्ट्रीयल एरिया के छोटे-छोटे कमरों में चल रहे स्टार्ट अप शान से बताते हैं कि हमारी कोशिश होती है कि टेक्नियान में जो भी नए प्रयोग हो रहे हैं, उन्हें कैसे प्रोडक्ट में बदलकर दुनिया के बाजार तक पहुंचाएं। इसी जज्बे के बूते विदेश मंत्रालय के अफसर समझाने की कोशिश करते हैं किहम तो इजरायल को ही स्टार्टअप नेशन कहते हैं। हर दिन कुछ नया करने की कोशिश करते हैं, ताकि दुनिया का प्रमुख आर एंड डी स्टेशन बन सकें। कुछ में सफल होते हैं और कुछ से हम नया सीखते हैं।
यही जज्बा इजरायल के हर शख्स में आत्मविश्वास बनकर महकता है। होटल में कीपा (छोटी यहूदी टोपी) पहनकर काम कर रहे वेटर से लेकर मार्केट में सब्जियां बेच रहे दुकानदार तक हर कोई इजरायल के बारे में कुछ उल्टा-सीधा नहीं सुनना चाहता है। उसके भीतर देशप्रेम धडक़नों का हिस्सा है। मजाक में लेडी वेटर जरूर कहती है कि इजरायल में हम सिर्फ खाते, खाते और खाते हैं, लेकिन वह भी जानती है कि इजरायली घड़ी की सुइयों के साथ सिर्फ और सिर्फ अपने देश के लिए काम करता है। पांच बजे सुबह सूरज उगने से लेकर रात 7.30-8 बजे दिन ढलने तक इजरायल ही उनके जीने का एकमात्र मकसद नजर आता है। हमें तकनीक और कौशल के साथ इजरायल से यह जज्बा भी लेना नहीं भूलना चाहिए।

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