ट्रम्प के आसपास असहमतियों की बाड़

TrumpPresident

वह मंगलवार का दिन था, जब डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति बने, लेकिन अमेरिका अब तक खुद अपने फैसले को स्वीकार नहीं कर पा रहा है। पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग नॉट माय प्रेसीडेंट की तख्तियां लेकर सडक़ों पर हैं। हाई स्कूल के बच्चे कक्षाओं का बहिष्कार कर चुके हैं। हालांकि अमेरिका इन असहमतियों को सकारात्मक ढंग से ले रहा है। क्योंकि ये ट्रम्प की नस्लीय भेदभाव, महिलाओं के बारे में सोच व शरणार्थियों के प्रति नकारात्मक टिप्पणियों के खिलाफ बाड़ लगा रही है। पद पर बैठने से पहले ट्रम्प को आगाह कर रही है कि प्रेसीडेंट तो हो गए हो, लेकिन अमेरिका ऐसा प्रेसीडेंट नहीं चाहता है। यदि सही अर्थों में बनना है तो अभी से समझ लो क्या नहीं करना है।

विश्व की महाशक्ति अमेरिका प्रेसीडेंट चुनाव के बाद राजनीतिक और सैद्धांतिक असहमतियों के एक नए नजरिये को गढ़ रही है। लोग अपनी असहमतियों को जिस तरह जाहिर कर रहे हैं, वह काबिले तारीफ है। चुनाव में जीतने के बावजूद लोग डोनाल्ड ट्रम्प के व्यक्तित्व और अतीत के उन कृत्यों को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं, जो उनकी सोच-समझ और अपेक्षाओं के अनुकूल नहीं है। परिणाम घोषित के होने के बाद से ही पूरे देश में विरोध-प्रदर्शनों का दौर चल रहा है। ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्वक और अनुशासित हैं, लेकिन छोटी-छोटी आगजनी, खिड़कियों व गाडिय़ों को क्षतिग्रस्त करने जैसे उन्मादी कदम भी उठ रहे हैं।

पोर्टलैंड में लोगों ने पुलिस पर चीजें फेंक कर विरोध जताया, एक कार को नुकसान पहुंचाया, मार्च निकाला। बाल्दीमोर में 600 से अधिक लोग सडक़ों पर उतर आए और ट्रम्प के खिलाफ मार्च निकाला। गलियों में बैठ गए, गाडिय़ों को कुछ देर के लिए जाम कर दिया। डेनवेर में 3000 लोग इकट्ठा हुए और कोलोरेडो में भी प्रदर्शन किया गया। लॉसएंजिल्स, सेन फ्रांसिस्को सहित कई इलाकों में हाई स्कूल के विद्यार्थी कक्षाओं का बहिष्कार कर बाहर आ गए। उनका कहना है कि हमारा बोलना इसलिए जरूरी है, क्योंकि हम वोट नहीं कर सकते। छात्र जो तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, उनमें साफ तौर पर लिखा है कि हम नहीं चाहते कि हमारे प्रियजन और दोस्तों को देश से बाहर कर दिया जाए। यह वह भविष्य नहीं है, जो हम चाहते हैं। आकलैंड, विस्कोसिन, लूईस एंड क्लार्क यूनिवर्सिटी तक प्रदर्शनों का दौर जारी है। लोगों ने व्हाइट हाउस से लेकर ट्रम्प की हाल ही में शुरू हुई होटल तक भी मार्च निकाला।

पोर्टलैंड के युवाओं का कहना है, चूंकि ट्रम्प प्रेसीडेंट है, इसलिए बहुत जरूरी है कि हमारा शहर वैसा हो जाए, जैसा हम इसे बनाना चाहते हैं। ये ट्रम्प के खिलाफ प्रदर्शन है, लेकिन यह हमारे शहर के लिए बदलाव की एक पुकार भी है। हमें अपनी तरक्की की रफ्तार को बढ़ाना होगा। तख्तियां साफ कह रही है कि नो हैट, नो फीयर इमिग्रेंट्स आर वेलकम हियर।

ट्रम्प के कुर्सी पर बैठने में 72 दिन बाकी हैं। इस बीच सत्ता के हस्तांतरण की पूरी प्रक्रिया होना है। ट्रम्प को इलेक्टोरल के एक और टेस्ट से गुजरना है। ओबामा और ट्रम्प के बीच 90 मिनट की मीटिंग हो चुकी है, जिसमें उन्होंने ट्रम्प को फॉरेन और डोमेस्टिक पॉलिसी के बारे में बताया है। लगातार इस तरह की बैठकें होंगी, जिसमें ट्रम्प को सहजता के साथ सत्ता के सारे सूत्र सौंपे जाएंगे। यह सगाई और शादी के बीच की अवधि है, जिसमें लोग ट्रम्प को अभी से बता देना चाहते हैं कि अमेरिका उस दिशा में नहीं जाना चाहता है, जहां तुम उसे ले जाना चाहते हो। यदि यही रुख है तो उसमें अमेरिका आपके साथ नहीं होगा।

ये प्रदर्शन बताते हैं कि जब फैसला जन भावना के अनुरूप न हो तो क्या होता है। ब्रिटेन यूरोपिय यूनियन से बाहर जाने का फैसला कर ऐसे ही जनविरोध का सामना कर चुका है। शायद ट्रम्प को भी इसका अंदाजा था, इस वजह से अपने पहले उद्बोधन में वे ऐसी सारी बातों को गोल कर गए। विरोध के ये सशक्त स्वर ट्रम्प को कार्यकाल के आखिरी दिन तक जनभावनाओं के अनुरूप फैसला लेने के लिए ऐसे ही विवश कर सकते हैं। यह समझना होगा कि असहमतियां और आपत्तियां सिर्फ राजनीतिक विचारधारागत मजबूरी की वजह से ही नहीं बनती हैं। उनके पीछे देश को सही दिशा में ले जाने की ईमानदार इच्छा भी हो सकती है। उसे सकारात्मक ढंग से लेकर आप विरोधियों के सामने समर्पण नहीं करतेे, बल्कि देश के प्रति और प्रतिबद्ध हो सकते हैं।

हालांकि सत्ता वहां भी इसे उसी तरह से ले रही है, जिस तरह हमारे यहां लिया जाता रहा है। ट्रम्प ने इन विरोधों को लेकर ट्वीट किया है कि बहुत खुले और निष्पक्ष चुनाव हुए हैं। अब मीडिया के उकसावे पर पेशेवर प्रदर्शनकारी प्रदर्शन कर रहे हैं। यह ठीक नहीं है। मीडिया यहां भी निशाने पर है, वहां भी निशाने पर है, लेकिन बावजूद इसके ट्रम्प के भाषा और बयानों में आया बदलाव इस विरोध की सार्थकता को खुद बयान कर रहा है। ट्रम्प के करीबी लोगों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि आप हमें एक वर्ष दीजिए, आपको यह देश पहले से बहुत बेहतर लगेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published.