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“शब्दों की छांव तले रोज नए ख्वाबों की ताबीर”

Life story

महाराजा भोज के शहर धार में जिंदगी के शुरूआती पन्ने खुले. विज्ञान और कानून की पढाई की, लेकिन मन तो शब्दों में ही रमता था. किताबों से दोस्ती कब शब्दों की मायावी दुनिया में ले गई पता ही नहीं चला. पत्रकारिता पेशा बना तो यही जुनून बन गया. अब शब्द ही खाते हैं, पीते है और उन्हें ही ओढ़ते-बिछाते हैं. शब्दों के साथ अनाम सफर पर निकले हैं, ये पगडंडी कहां लेकर जाएगी, कभी सोचा नहीं. बस सफर को जी रहा हूँ. उसी के आनंद में हूँ और रहना भी यहीं चाहता हूँ.