धडक़नों में जिंदा है 220 बरस का एक बूढ़ा

ghalib

mirza ghalib

220 बरस का एक बूढ़ा मेरे साथ रहता है। जब से होश संभाला वह गली और जिंदगी के हर नुक्कड़ पर मुझसे टकराता है। मेरे कानों में कुछ फूंक जाता है। मैं उसे सुनता हूं, गुनगुनाता हूं और हर बार अपने आप को पहले से बेहतर पाता हूं। मैं दावा नहीं करता कि मैं उसके बारे में बहुत जानता हूं या मैंने उसे खूब पढ़ा है। मैं बस इतना जानता हूं कि बीते वक्त के तमाम उतार-चढ़ाव में वह कहीं न कहीं मेरे साथ खड़ा रहा है। जहां अटकते हैं, उनकी नजर से जहां के नक्शे करम देखने की कोशिश करते हैं।

मिर्जा गालिब के साथ पहली मुलाकात यकीनन गुलजार साहब ने कराई। दूरदर्शन के दौर में उन्होंने गालिब पर एक टीवी सीरियल बनाया। कच्ची उम्र की गीली मिट्टी में गालिब से महोब्बत का बीज वहीँ डला। जनाब कैफी आजमी और गुलजार ने बड़ी मेहनत की और नसीर साहब ने गालिब को टीवी पर जिंदा कर दिया। बहुत ज्यादा समझ नहीं आता था, लेकिन जब टाइटल सांग कानों में पड़ता … ” हैं और भी दुनिया में सुखनवर बहुत अच्छे, कहते हैं कि गालिब का है अंदाजे बयां और” … तो जिस्म में झुरझुरी सी मच जाती। गुलजार जब कमेंट्री करते तो आधे से ज्यादा बातें सिर के ऊपर से जातीं, लेकिन बोलने का लहजा और शब्दों की दौलत रोम-रोम में खुशबू घोल देती। जगजीत के संगीत ने गालिब को दीवानगी की हद तक भीतर पहुंचा दिया।

एक शायर की जिंदगी, उसका संघर्ष, उसका स्वाभिमान, उसके जज्बात और उसकी लड़ाई क्या होती है, कैसी होती है। वह कैसे देखता, समझता और सोचता है? फाकाकशी कैसे उसकी सबसे बड़ी दौलत बन जाती है। उसकी जलन और अवसाद भी मिर्र्जा गालिब के उन चंद एपिसोड से बेहतर कौन समझा सकता था। जिंदगी की तमाम रुसवाइयों और बेबसियों के बीच कोई कैसे शब्दों का जहां खड़ा करता है। अपने अहसासों को कैसे जीता है, कैसे उन्हें बयां करता है। कैसे असद से गालिब यानी विजेता हो जाता है। यह शुरुआत भर थी, इसके बाद गजलों के शौक ने गालिब को गले का हार ही बना दिया। मिर्जा गालिब सीरियल की गजलों पर आई कैसेट्स ने फिर वही रंग और खुशबू घोल दी।

इसके बाद तो मालूम नहीं कहां-कहां से और कैसे-कैसे गालिब मुझ तक आए। कॉलेज में दोस्तों को चिढ़ाने के लिए भी गालिब ही साथ आते थे। “हजार ख्वाहिश ऐसी कि हर ख्वाहिश पर दम निकले, बहुत निकले मेरे अरमान फिर भी कम निकले, बड़े बे आबरू होकर तेरे कूचे से हम निकले।” इतनी जोर-जोर से चीखकर सुनाते थे कि मन का सारा मवाद निकल जाता। कोई शिकायत बाकी नहीं रहती। फिर वाद-विवाद के मंचों पर भी गाहे-बगाहे गालिब ही तालियों को तकिया लगवाते थे। “कभी कह उठते… दिल के खुश रखने को गालिब ये खयाल अच्छा है” और तो कभी दोहरा देते कि “बोसा देते नहीं और दिल पे हर लहजा निगाह, जी में कहते हैं मुफ्त आए तो माल अच्छा है।”

फिर जिंदगी के हर मोड़, हर अहसास के साथ गालिब की मौजूदगी बनने लगी। किसी साथी का दिल कहीं लगा तो बोल दिया… “महोब्बत में नहीं है फर्क जीने मरने का, उसी को देखकर जीते हैं, जिस काफिर पर दम निकले।” और दिल टूट गया तो … “तुझे महोब्बत करना नहीं आता, मुझे महोब्बत के सिवाय कुछ नहीं आता, जिंदगी गुजारने के दो ही तरीके हैं गालिब एक तुझे नहीं आता एक मुझे नहीं आता।” दिनभर ये पंक्तियां कानों में घुंघरू की तरह बजती रहती और उसका भी मन हल्का हो जाता। बहुत तकलीफ में होते, परेशान किए जाते तो जरूर दोहराते … “दिल ही तो है ना संग ओ खिश्त दर्द से भर न आए क्यों, रोएंगे हम हजार बार कोई हमें सताए क्यों।”

जब कभी अकेलापन महसूस होता तो भी चचा गालिब ही याद आते… “कितना खौफ है शाम के अंधेरों में, पूछ उन परिंदों से जिनके घर नहीं होते।” बस यह दोहराते और खुद के भीतर लौट आते। घोर निराशा से लम्हों में भी गालिब का ही सहारा होता… “रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं कायल, जब आंख से न टपका तो फिर लहू क्या है।” तब लगता कि मुश्किल हालात और चुनौतियों से ही तो जिंदगी की लज्जत है, क्यों हार के बैठा जाए और यह नहीं तो कुछ और किया जाए।

कितना कहूं, कितना लिखूं। जब-जब कदम ठिठके हैं, रुके हैं, थमे-सहमे हैं। हर बार गालिब हाथ पकड़ कर बढ़ा ले जाते हैं। कुछ कदम उनके साथ चलता हूं तो देखता हूं, पैरों को नई ताकत मिल गई है, उम्मीदों को नई परवाज मिल गई है। उनके शब्दों की दौलत चरागों की तरह राह रोशन कर देती है। इसलिए 27 दिसंबर को पैदा हुए गालिब 220 साल भी हम सबके भीतर जिंदा हैं और पीढिय़ों तक हमारी सांसों के साथ सांस लेते रहेंगे, हमारे सीनों में धडक़ते रहेंगे। जब भी कहीं खड़े होकर पुकारेंगे, चचा गालिब हमेशा हमारे साथ होंगे। वह क्या हैं ये खुद भी नहीं बता पाए…
“पूछते हैं वो कि गालिब कौन है, कोई बतलाओ कि हम बताएं क्यां।”

Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.