नाम

बारिश में बंद कार के शीशों पर वह लिख देती है अपना नाम जानती है ये धुंध मेरी सांसों से हैं चाहती है मेरी सांसों पर अपना नाम चंद पलों …

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अब और अगस्त नहीं

मैं दुनिया के सारे कैलेंडर इकट्ठा करना चाहता हूं उनमें से अगस्त फाड़ कर निकाल देना चाहता हूं नहीं चाहता किसी कैलेंडर में अगस्त का महीना हो आगे भी जो …

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रोटी का सपना

तेरी पीठ पर बस्ता मेरी पीठ पर झोला तेरी पीठ तुने नहीं बनाई मेरी पीठ किसने बनाई मैं तुम्हारी किताबें पढऩा चाहती हूं बस्ते में क्या है बस एक बार …

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