नाम

बारिश में बंद कार के शीशों पर वह लिख देती है अपना नाम जानती है ये धुंध मेरी सांसों से हैं चाहती है मेरी सांसों पर अपना नाम चंद पलों …

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रोटी का सपना

तेरी पीठ पर बस्ता मेरी पीठ पर झोला तेरी पीठ तुने नहीं बनाई मेरी पीठ किसने बनाई मैं तुम्हारी किताबें पढऩा चाहती हूं बस्ते में क्या है बस एक बार …

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प्रतिगामी

इस अंधेरे में दीपक जलाना क्यों चाहते हो अपनी लकीरों को आजमाना क्यों चाहते हो बह चुका है नदी का सारा पानी यहां से हाथों में प्यास लिए भटकना क्यों …

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