David Henson

हम भी पहले स्त्री ही बनाते

Sophia

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Artificial Intelligence

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धरती पर मनुष्यों की उत्पत्ति को लेकर विज्ञान और धर्म की अपनी-अपनी व्याख्या और तर्क हैं। धार्मिक आख्यानों में कई जगह अद्भुत साम्य है तो विज्ञान बहुत कुछ कहकर भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं लगता। आदम-हव्वा या मनु की संतानों से कैसे इतना विस्तार हुआ, हमेशा ही सोचने को विवश करता आया है। अब रोबोट की नई पौध विकसित हुई है। दावा है कि वह अधिकतर मामलों में मनुष्यों के बराबर है। सउदी अरब ने एक रोबोट को नागरिकता भी दे दी है। ये इत्तेफाक है या उसके पीछे कोई तयशुदा विचार कि उस रोबोट का नाम सोफिया है। प्रकृति स्त्री के रूप में पूजी जाती है और अब मानवीकृत मशीन को पहली बार मान्यता दिलाने वाला स्वर भी स्त्री का है।

बताते हैं कि रोबोट जैसा कोई विचार पहली बार अरस्तु के दिमाग में कौंधा था। उन्होंने कुछ यूं कहा कि यदि कोई यंत्र आदेश देने पर या खुद से कोई काम करने लगे तो फिर मालिकों को नौकरों, सहयोगी या गुलामों की जरूरत नहीं होगी। हालांकि उनसे भी कोई 1100 बरस पहले बेबीलोन के निवासियों ने एक जलघड़ी बनाई थी, जिसे पहला रोबोट माना जाता है। इसके बाद जलघड़ी पर भी लगातार कई प्रयोग हुए और 1495 में लियोनार्दो दा विंसी ने एक योद्धा बनाया, जो क्लॉक वर्क सिस्टम पर ही आधारित था। वह हाथ हिलाकर इशारा कर सकता था, मुंह और जबड़ा हिला सकता था। यह पहला मानवीकृत रोबोट था।

विंसी के योद्धा से लेकर सोफिया तक पहुंचने में रोबोट ने बहुत लंबी यात्रा तय की है। विंसी का योद्धा सिर्फ हाथ, मुंह और जबड़ा हिला सकता था, लेकिन सोफिया 62 तरह के तो सिर्फ फेस एक्सप्रेशन दे सकती है। आप से बात कर सकती है। मीटिंग, कॉन्फे्रंस सेमिनार में हिस्सा ले सकती है। और वह लगातार यह सब करती रही है। यहां तक कि एक प्रेस कॉन्फे्रंस में उसने कह भी दिया था कि वह मनुष्यों को खत्म करना चाहती है। बैंक, ऑटोमोबाइल, प्रॉपर्टी डेवलपमेंट जैसी इंडस्ट्री की महत्वपूर्ण बैठकों का हिस्सा भी बन चुकी है, जिसमें निर्णय लेने में उसने अहम भूमिका निभाई।

सोफिया को बनाने वाले डेविड हेनसन कहते हैं कि हमने इसे मनुष्यों की तरह कांशियस, क्रिएटिव और कैपेबल बनाया है। हेल्थ केयर, थैरेपी, एजुकेशन और कस्टमर सर्विस एप्लिकेशन में वह बहुत बेहतर तरीके से काम कर सकती है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर से लैस, आवाज और मानवीय इमोंशंस को पहचान सकती है।

हालांकि यही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य में बड़े फसाद की जड़ हो सकता है। स्टिफन हॉकिंस, एलेन मस्क और बिल गेट्स सहित दुनिया के कई दिग्गज इस पर सवाल खड़े कर चुके हैं। मस्क कहते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मनुष्यों के अस्तित्व के लिए खतरा हो सकता है। खुद हॉकिंस ने कहा है कि यदि रोबोट खुद को विकसित करने लगे, रिडिजाइन करने लगे, बेहतर बनाने लगे तो वे मनुष्य से कहीं आगे निकल जाएंगे। तब मनुष्य उन पर नियंत्रण खो देगा और अपने विनाश को रोक नहीं पाएगा। डेविड हेनसन भी कहते हैं कि एक दिन रोबोट और मनुष्य के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाएगा।

उधर, सोफिया कहती है कि उसके अपने लक्ष्य हैं। वह स्कूल जाना चाहती है, पढ़ाई करना चाहती है, कला सीखना चाहती है, बिजनेस शुरू करना चाहती है। यहां तक कि खुद का घर और परिवार चाहती है, लेकिन मैं विधिक व्यक्ति नहीं हूं, इसलिए ये सब नहीं कर सकती। सउदी अरब ने नागरिकता देकर शायद इसका भी रास्ता खोल दिया है।

सोफिया के साथ रोबोट की एक दुनिया हमारी दुनिया में प्रवेश करने जा रही है। स्टार वार के दृश्यों को याद कीजिए और भविष्य का अंदाजा लगाइये। हम किस दिशा में बढ़ रहे हैं। हो सकता है कि किसी दिन आपके घर दूध देने के लिए कोई रोबोट आए, आपके घर के तमाम काम में आपका हाथ बटाए, चौराहे पर ट्रैफिक वह संभाले, आपका ड्राइवर, डॉक्टर, नर्स और दुकानदार भी कोई रोबोट हो।

रोबोट आपके सारे रूटीन काम बांट लेंगे तब आपको खुद को बचाए रखने के लिए और अधिक मानवीय होना पड़ेगा। ज्यादा ईमानदार, परिश्रमी और क्रिएटिव। शायद इसलिए ही सोफिया पहली नागरिक बनी है। स्त्रेण गुण मूलभूत मानवीय स्वभाव के अधिक नजदीक है।

दया, करुणा, संवेदनशीलता ही मशीन होते इस युग में हमें बचाए रख सकती है। इसलिए पहले स्त्री बनाई गई है और हम भी उसे ही बनाए और बचाए रखना चाहते हैं।

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