रोटी का सपना

तेरी पीठ पर बस्ता
मेरी पीठ पर झोला
तेरी पीठ तुने नहीं बनाई
मेरी पीठ किसने बनाई

मैं तुम्हारी किताबें
पढऩा चाहती हूं
बस्ते में क्या है बस
एक बार देखना चाहती हूं

और जानना चाहती हूं
स्कूल की उन दीवारों में
कैसी होती है दुनिया
जहां तुम रोज हंसते हुए जाते हो

इजाजत हो तो एक बार
तुम्हारे सपनों में जाकर
देखना चाहती हूं
सपने आखिर होते कैसे हैं

मेरे झोले की दुनिया वैसी
नहीं है, बदबू आती है
फिर भी मुझे पसंद है
इससे घर के लिए रोटी आती है।।

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