थोड़ी गलतियां भी हो जाने दो यार

क्वीन एलिजाबेथ बीमार हुई हैं। पहली बार नहीं हुईं, लेकिन इस बार स्थिति अलग है। सलामती की दुआओं के बीच जो बात सबसे अधिक चौंकाती है, वह उनके शोक की रिर्हसल है। बताते हैं कि क्वीन की सेहत को देखते हुए एक बैठक हुई। इसमें निधन के बाद होने वाली सारी गतिविधियों की रूपरेखा तय की गई। आप सोच सकते हैं कि आखिर इंग्लैंड की महारानी का मामला है, अगर उनकी मौत के बाद कोई हड़बड़ाहट हुई तो सदियों उसकी मिसाल दिए जाने का खतरा है। इसलिए पहले से तैयारी में बुराई क्या है। फिर खयाल आता है कि अगर मौत के बाद शोक भी प्लान करके मनाएंगे तो बाकी क्या रह जाएगा। छोटी-मोटी गलतियों का ऐसा भी क्या डर, जो मरने से पहले ही इंतजाम शुरू करना पड़ जाएं।

अखबारों का दावा है कि हाल ही में जो रिहर्सल हुई है उसमें डी प्लस वन डे का प्लान किया गया है। यानी मौत के अगले दिन इंग्लैंड क्या करेगा, यह तय किया गया है। यह रिहर्सल इंग्लैंड के इतिहास में पहली बार हुई है। इसमें 10 दिन के राष्ट्रीय शोक की रूपरेखा बनाने के लिए पहली बार कैबिनेट मिनिस्टर और अफसर साथ बैठे हैं। बाकी सब के लिए पूरा प्रोग्राम तय है कि परिवार के लोग कब उनके अंतिम दर्शन करेंगे। कौन कहां जाएगा, कैसे क्या करेगा।

इंग्लैंड के अखबार और साइट्स खंगालने की कोशिश करेंगे तो पाएंगे पूरा एजेंडा बना हुआ है। रानी की मौत के 12 दिन बाद तक इंग्लैंड में क्या और कैसे होगा। महल के सदस्य प्रधानमंत्री को सूचना देने के लिए एक विशेष कोड का इस्तेमाल करेंगे। वह कोड होगा लंदन ब्रिज इज डाउन। यदि रात को महारानी की मौत हो गई तो सुबह 8 बजे इसकी घोषणा की जाएगी। इसके बाद बीबीसी अपने सभी कॉमेडी शो बंद कर देगा और सभी रिपोट्र्स और एंकर अपने साथ एक काला कपड़ा रखेंगे, जिससे उनके गलत ड्रेस में टीवी पर आने का खतरा न रहे। 12 दिन तक यही स्थिति जारी रहेगी।

मौत का समाचार प्रसारित करने के बाद लंदन स्टॉक एक्सचेंज तुरंत बंद कर दिया जाएगा। लाइट म्यूजिक के बीच शोक संदेश प्रसारित किए जाएंगे। यहां तक कि नेशनल एंथम में बदलाव किया जाएगा। उसके शब्द बदले जाएंगे, ताकि महारानी की मृत्यु को उसमें शामिल किया जा सके। महारानी की मृत्यु और नए राजा की ताजपोशी के दिन सरकारी अवकाश रहेंगे। यह भी तय है कि किस हॉल में महारानी का शव रखा जाएगा, ताकि आम लोग दर्शन कर सकें, उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें।

समझ नहीं आता है कि आखिर गलतियों से इतना डर क्यों है। क्या हो जाएगा अगर कोई छोटी सी गलती हो भी गई। कोई आसमान नहीं टूटेगा, धरती नहीं फट जाएगी। लेकिन न जाने किस तरह का जुनून हम पर तारी है कि गलतियों के रास्ता लगातार संकरा करते जा रहे हैं। जरा सी गलती पर फैल जाते हैं, चीखने-चिल्लाने लगते हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि मशीनों के साथ रहते-रहते मशीनों की तरह परफेक्शन की इतनी आदत हो गई है कि थोड़ी भी ऊंच-नीच सही नहीं जाती।

क्या हो जाएगा यदि महारानी की मौत के बाद कोई रिपोर्टर तडक़-भडक़ के साथ टीवी स्क्रीन पर पहुंच गया या हड़बड़ाहट में कोई गलत म्यूजिक प्ले कर दिया गया। हंसी उडऩे का डर इतना हावी कैसे हो सकता है कि वह जीवन की सहजता को ही खत्म कर दे। हमें समझना ही होगा कि हम मशीन नहीं हैं और हमारे भीतर की कार्यप्रणालियां अक्सर आपात स्थितियों में काम करना बंद कर देती है। हम कई बार दुर्घटना से बचने के लिए ब्रेक के बजाय एक्सीलरेटर पर पैर मार देते हैं और छोटी दुर्घटना को बड़ा बना लेते हैं।

यह सब होता आया है और होता भी रहेगा। इन्हीं से जीवन की लज्जत भी है। हम एक बार गलतियां करते हैं और उसके बाद वर्षों तक उन पर ठहाके लगाते हैं। आज की गलती कल की मुस्कान बन जाती है, लेकिन अगर गलतियों से इतना ही डरने लगे तो क्या होगा। परफेक्शन की भूख समझ आती है, लेकिन बस समझ लीजिए कि जब तक ये गलतियां हैं, तब तक इंसान और इंसानी सीमाएं हैं। और तभी तक मासूमियत भी जिंदा है। जिस दिन ये 19-20 का हिसाब खत्म हुआ, उस दिन हमें भी फना होने से कोई रोक नहीं पाएगा।

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