हम लड़कियां क्यों छेड़ते हैं

न्यूज प्राइम टाइम बहस में अभूतपूर्व भीड़ है। विषय ही कुछ ऐसा है, जिस पर बात करने और सुनने के लिए सब उतावले हो रहे हैं। विभिन्न दलों के प्रतिनिधि मौजूद हैं और श्रोताओं में हर आयु वर्ग के लोग जुबान की धार तेज करके बैठे हैं। इसी बीच लाइट, कैमरा और एक्शन होता है। पीछे से कोई रोल कहता है और सूट में एंकर प्रकाश पुंज के साथ आगे कदम बढ़ाते हुए आता है। स्वागत, अभिनंदन और चैनल के महिमा मंडन के बाद एक लाइन में एजेंडा रखता है। सवाल उछाल देता है कि आखिर हम लड़कियां क्यों छेड़ते हैं।

अ पार्टी के एंकर मित्रवेदी- यह सवाल हमसे पूछने के बजाय, उन लोगों से पूछिए, जिनके मंत्री खुद इस तरह की हरकतों में लिप्त पाए गए हैं। न खाऊंगा, न खाने दूंगा कहकर सत्ता में आए थे, लेकिन देखिए इनके मंत्री क्या नहीं कर रहे हैं। क्या यही अच्छे दिन हैं।

ब पार्टी के अपात्र- हम पर सवाल उठाने से पहले कृपया अपनी पार्टी के पितृ पुरुष के चरित्र पर भी रोशनी के कुछ छींटे डाल लीजिए। अब गूगल करेंगे तो सिगरेट जलाते हुए कई फोटो आ जाएंगे। वैसे भी अभी यह जांच का विषय है, कोई ऐसे ही आरोप लगा देगा कि 10-15 साल पहले हमें छेड़ा गया है तो क्या मान लीजिएगा। देश में कानून का राज है, कानून की एक प्रक्रिया होती है।

मित्रवेदी- फिर आप कौन से कानून के तहत हमारे पितृ पुरुष पर आरोप लगा रहे हैं। आपके महापुरुष के कांधों पर भी कई हाथ देखे गए हैं, उनके हाथ में भी कुछ हाथों की नरमी तस्वीरों में महसूस की गई है। तब तो आपने कुछ नहीं कहा। हमारे फोटो में आपको पता नहीं क्या-क्या नजर आ रहा है। कथनी और करनी का भेद साफ नजर आ रहा है।

बीच में एंकर चीखता है, देखिए आप मुद्दे को भटका रहे हैं। हम यहां एक बहुत संवेदनशील विषय पर बात करने के लिए आए हैं और आप मुद्दे पर बात कीजिए। तभी उसके कान में पीसीआर में बैठा आदमी चीखता, अबे इन्हें इसी चिल्लाचोट के लिए बुलाते हैं बुडबक चलने दे। अभ्यस्त एंकर इस पर ध्यान नहीं देता है। और अगले वक्ता को घसीटने की कोशिश करता है।

स पार्टी की श्रीमती आंबा- देखिए देश ने आप दोनों के राज देखे हैं, आपके नेताओं की करतूतें भी देखी हैं। जनता आप से ऊब चुकी है। आप लोगों ने हमेशा मुद्दों पर बात करने के बजाय उन्हें भटकाने की कोशिश की है। अगर मंत्री छेड़छाड़ में लिप्त हैं तो उन्हें कड़ी सजा देना ही चाहिए। आप न दे पाएं तो हमें मौका दें हम देकर दिखा देंगे।

ब पार्टी के अपात्र बीच में टोकते हुए- पहले आप अपने मंत्रियों की करतूतों पर तो लगाम लगा लीजिए। उसके बाद बोलने की जहमत उठाइयेगा। राशन कार्ड बनना बंद हो गए क्या आपकी सरकार में।

इतना सुनते ही पूरे स्टूडियो में शोर शराबा होने लगता है, कुछ सुनाई नहीं देता। इस बीच कुछ लोगों के माइक बंद कर दिए जाते हैं। एंकर फिर बीच में आता है और अगली पार्टी के प्रतिनिधि को बोलने को कहता है।

द पार्टी के मौलाना- देश ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि ये दिन देखना पड़ेगा। देश में कानून-व्यवस्था खत्म हो चुकी है। मां, बहू, बहन, बेटियां सुरक्षित नहीं है। अगर मंत्री ही इस तरह की हरकत पर उतारूं है तो बाकी लोगों का क्या होगा।

ब पार्टी के अपात्र बीच में कूद पड़ते हैं। मौलाना आप तो इस बारे में बात ही मत कीजिए। पहले अपने गिरबान में झांककर देखिए। स्त्री की स्थिति आपके यहां कैसी है, उसके बाद कीजिएगा। इतने सालों में कभी किसी ने सोचा था कि सदियों से चली आ रही तीन तलाक की यह कुपरंपरा खत्म होगी। सरकार ने बेडिय़ों से मुक्त किया है।

स पार्टी की आंबा- ये आपने खूब कही, बड़ी बेडिय़ों से आप देश को आजाद कर रहे हैं। महिलाओं का कितना सम्मान करते हैं, ये आप अपने आलाकमान से पूछिए। जो अपनी पत्नी के नहीं हुए, वे क्या दूसरों की स्त्रियों का सम्मान करेंगे।

अपात्र चीखत हैं… ये व्यक्तिगत बातों का मंच नहीं है। अगर हमें यहां किसी के व्यक्तिगत जीवन पर छींटाकशी के लिए बुलाया गया है तो कृपया यह नौटंकी बंद कर दीजिए। यहां बात करने का कोई मतलब ही नहीं है।

और इस गर्मागर्म बहस के बीच में टूथ पेस्ट से लेकर लक्जरी कार तक बेचते हुए लड़कियां विज्ञापन फिल्मों को चमकाती नजर आती हैं। स्टूडियो में बैठी जनता सोचते हुए उठती है कि जिस देश का मीडिया, सियासत और सियासतदानों का यह हाल होगा, उस देश में लड़कियों को छेड़छाड़ से कोई कैसे बचा पाएगा। सोशल मीडिया पर मी टू कैम्पेन चला रही आधी आबादी ट्रोल होती है, अब तक क्यों चुप बैठी रही, पब्लिसिटी स्टंट है। फायदा उठाते समय ले लिया अब क्यों बवाल कर रही हैं। वह सिर्फ ठंडी सांस लेकर रह जाती है।

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