दिनकर को चुनौती देने वाले कवि की जिंदगी का हासिल

79 साल के एक बाबा ऑफिस आए। हाथ में 1970 में प्रकाशित स्वलिखित पुस्तक थी, शीर्षक था उमर हार दी एक दाव पर। साथ में कुछ पेज और महाकवि रामधारीसिंह …

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