अबकी बार ढाई रुपए की सरकार

हमारे धार में मौलाना कमालुद्दीन का उर्स लगता है। उसमें बड़ा मेला भी होता है, जिसमें पुराने कपड़ों की बड़ी मंडी लगती है। इसमें कोट सूट और स्वेटर से लेकर …

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सवर्णों के गुस्से में छुपी लोकतंत्र की जीत

मुर्दा जिस्म सिर्फ श्मशानों के काम आते हैं। जिंदा कौमें अपनी बारी का इंतजार नहीं करती। वह लडऩा जानती है। हार-जीत का सवाल तो कभी रहा ही नहीं। सवाल अपनी …

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