27jan

एक वो और एक ये 27 जनवरी

सुबह से इसी उधेड़बुन में हूं। सोचता हूं कि वह 27 जनवरी कैसी रही होगी। संविधान लागू होने के ठीक एक दिन बाद वाली। अपने कायदे-कानून वाली हमारी धरती पर …

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इन रंगों को मेरी रगों में दौडऩे से नहीं रोक पाओगे

कोई कितना भी कुछ कहे, इन रंगों से मेरी देह ही नहीं आत्मा का कोई रिश्ता है। लाख कोशिश कर लीजिए, मेरी रगों में इन रंगों को दौडऩे से नहीं …

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