किरदारों का बिरला समुच्चय

कलाकार अकसर दो धु्रवों पर जीते हैं। एक उनका हुनर है और एक वे खुद। जैसे-जैसे कला बड़ी होती है, कलाकार का अस्तित्व उसमें खोने लगता है, लेकिन तिरोहित नहीं …

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