ट्रंप-ट्रंप नहीं यूएसए-यूएसए

TrumpPresident

आपने गौर से सुना अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भाषण और उस दौरान आने वाली आवाजों को। वे शब्द कुछ अलग इशारा कर रहे थे। जीत के बाद कहीं भी ट्रंप-ट्रंप का शोर नहीं था, जबकि ट्रंप सीधे राष्ट्रपति चुने गए थे। कह सकते हैं, अपने दम पर चुनाव जीते हैं, फिर भी लोग उनके नाम के बजाय यूएसए-यूएसए चिल्ला रहे थे। उन्होंने भी यही कहा चुनाव प्रचार अब खत्म हो गया है। अब हमें देश के लिए काम करना होगा। कोई सपना बड़ा नहीं होता, कोई चुनौती महान नहीं होती, जिसे पूरा न किया जा सके।

चुनाव प्रचार के दौरान डोनाल्ड ट्रंप के रुख, महिलाओं को लेकर उनकी टिप्पणी, बयानबाजी और लीक वीडियो को लेकर उनके बारे में बहुत अच्छी सोच नहीं बना पा रहा था। नतीजे आने के बाद आए उनके पहले भाषण ने जरूर कुछ सोचने पर विवश किया है। सबसे पहली बात जो मुझे अच्छी लगी वह यह कि ट्रंप के पहले उपराष्ट्रपति चुने गए पेन्स बोले। ट्रंप ने मंच लूटा नहीं, कब्जा करके बैठ नहीं गए उस पर। सबसे बड़ी बात सारा श्रेय खुद लेने की कोशिश नहीं की। एक-एक कर सहयोगियों को याद किया, चुनाव अभियान के दौरान उनके परिश्रम को सबके सामने रखा। अपने अभिभावकों के स्नेह और उनकी सीख ताजा की। बहनों और भाई को याद किया। दिवंगत भाई को भी नहीं भूले। पत्नी को भी उसी सम्मान के साथ मंच से पुकारा। ट्रंप ने कई बार दोहराया कि हमारे पास अत्यंत प्रतिभाशाली लोगों की टीम है, जिसने लंबे चुनाव अभियान में अविश्वसनीय सहयोग किया। यह अभियान बहुत कठिन था, राजनीति मुश्किल है, जिसमें इन सब लोगों ने जबरदस्त सहयोग किया।

दूसरी बात, ट्रंप ने किसी तरह का अलगाव और अविश्वास पैदा करने वाली बात नहीं की। शुरुआत में ही अपने प्रतिद्वंद्वी और चुनाव प्रचार के दौरान उन पर करारे हमले करने वाली हिलेरी क्लिंटन की प्रशंसा की। देश के लिए की गई उनकी सेवाओं को याद किया। यह दोहराया कि मेरे पास क्लिंटन का फोन आया था। स्पष्ट करने की कोशिश की कि आप विरोधी हो सकते हैं, लेकिन दुश्मन नहीं। यह वक्त है, सबके साथ आने का और मिलकर काम करने का। उन्होंने यह कहकर जीत का श्रेय देशवासियों को ही दिया कि मेरी जीत उनकी बदौलत है, जो अमेरिका से प्यार करते हैं। नॉनपॉलिटिकल बैकग्राउंड को अपनी ताकत बनाकर पेश किया कि मैंने जीवनभर बिजनेस किया है। दुनियाभर में व्यवसाय की छुपी संभावनाओं को खोजा है। ऐसे ही बिजनेस प्रोजेक्ट लगाए, जिससे सफलता के नए रास्ते खोज पाऊं। वही काम अब मैं अपने देश के लिए करना चाहता हूं।

यही चाहता हूं कि इस देश के हर व्यक्ति को अपनी प्रतिभा के इस्तेमाल का पूरा मौका मिले। मेरे पास इकोनॉमिक प्लान है, हम देश की विकास दर को दोगुना करेंगे। नया अमेरिका बनाएंगे, जिसमें सबको पूरा अवसर मिलेगा। आखिर में यह दोहराया कि मैं देश से प्यार करता हूं और अब वक्त है ऐसा काम करने का जिससे सभी अमेरिकन को अपने राष्ट्रपति पर गर्व हो, अपने देश पर गर्व हो।

ट्रंप की जीत के बाद मन में एक ही खयाल आता है कि क्या मतदाता का रुख सार्वभौमिक रूप से बदल चुका है। ऐसा नहीं लगता कि अब उसे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप व्यक्तिगत जीवन में कैसे रहे हैं, आप पैदाइशी राजनीतिज्ञ हैं या फिर किसी कारण से यहां आ पहुंचे हैं। कट्टरवादी हैं या उदार हैं। किस के बारे में क्या सोच रखते हैं। आप पर लगे पिछले आरोपों को भी वह खारिज करने को तैयार है, बशर्ते उसे आपके भीतर एक आक्रामक, जुझारू और जुनूनी व्यक्ति नजर आए। जो अपना जुनून सबके साथ बांट पाए, टीम के रूप में उन्हें साथ लेकर चल पाए। सार्वजनिक हित के मुद्दों पर उसकी सोच में स्पष्टता और सबसे ऊपर काम करने का माद्दा नजर आए। ट्रंप की जीत हमारे नेताओं के लिए भी ढेर सारी सीख लेकर आई है और यह उम्मीद भी कि राजनीति पर देशहित की ही जीत होगी।

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